ट्रंप के नए टैरिफ से भारतीय टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगा बूस्ट, बांग्लादेश पर 35% शुल्क से भारत को फायदा

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बांग्लादेश सहित कई देशों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क ने भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के लिए नए अवसर खोल दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश पर 35% टैरिफ से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यह कदम भारत के लिए 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।

ट्रंप के टैरिफ का वैश्विक प्रभाव

7 जुलाई 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने 14 देशों पर नए “पारस्परिक टैरिफ” (Reciprocal Tariffs) की घोषणा की, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होंगे। इनमें शामिल हैं:

  • 25% शुल्क: जापान, दक्षिण कोरिया, कजाकिस्तान, मलेशिया, ट्यूनीशिया

  • 30% शुल्क: दक्षिण अफ्रीका, बोस्निया-हर्जेगोविना

  • 32% शुल्क: इंडोनेशिया

  • 35% शुल्क: बांग्लादेश, सर्बिया

  • 36% शुल्क: कम्बोडिया, थाइलैंड

  • 40% शुल्क: लाओस, म्यांमार

भारत पर प्रस्तावित शुल्क 26-27% है, जो बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है। ट्रंप ने यह टैरिफ ब्रिक्स देशों और अन्य उभरते बाजारों पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने के आरोप के जवाब में लगाए हैं।

भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए अवसर

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (CITI) के चेयरमैन राकेश मेहरा ने कहा, “बांग्लादेश और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर भारी टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए कीमत के मोर्चे पर लाभकारी साबित होगा। हम इन शुल्कों के प्रभाव और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर नजर रख रहे हैं।” उन्होंने बताया कि 2024 में भारत का अमेरिका को टेक्सटाइल और परिधान निर्यात 10.5 अरब डॉलर था, जो कुल निर्यात का 35% है।

CTA अपैरल्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. मुकेश कंसल ने कहा, “बांग्लादेश पर 35% टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक है। यह हमें अमेरिकी खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक बनाएगा, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार समझौतों पर निर्भर करेगा।”

बांग्लादेश पर टैरिफ का प्रभाव

2024 में बांग्लादेश 13.15% बाजार हिस्सेदारी के साथ अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक था, जिसका निर्यात 8.4 अरब डॉलर (7.34 अरब डॉलर रेडीमेड गारमेंट्स) था। 35% टैरिफ से बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धी क्षमता पर असर पड़ेगा, जिससे अमेरिकी खरीदार भारत, पाकिस्तान, और तुर्की जैसे कम शुल्क वाले देशों की ओर रुख कर सकते हैं। बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जो 80% निर्यात राजस्व और 40 लाख नौकरियां प्रदान करती है, पहले ही 2024 की राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही है।

भारत की स्थिति

भारत, जो 2024 में 6% बाजार हिस्सेदारी के साथ अमेरिकी परिधान बाजार में छठा सबसे बड़ा निर्यातक था, अब बांग्लादेश और वियतनाम (19% हिस्सेदारी) से हिस्सेदारी छीन सकता है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के उपाध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा, “चीन पर 54% और बांग्लादेश पर 35% टैरिफ से भारत को प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों गारमेंट्स में फायदा होगा।” 8 जुलाई को गोकालदास एक्सपोर्ट्स, केपीआर मिल, वर्धमान टेक्सटाइल्स, और अरविंद लिमिटेड जैसे भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में 8% तक की तेजी देखी गई।

विशेषज्ञों की राय

  • प्रभु धमोधरन, इंडियन टेक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन: “भारत को कॉटन आयात शुल्क (11.5%) को शून्य करना चाहिए ताकि अमेरिकी मांग को पूरा किया जा सके।”

  • संजय जैन, टीटी लिमिटेड: “टैरिफ स्थायी होने पर भारत अमेरिकी बाजार में सबसे सस्ता आपूर्तिकर्ता बन सकता है।”

  • दिव्या श्रीनिवासन, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस: “भारत को वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला हब के रूप में स्थापित करने के लिए निर्माताओं को प्रोत्साहन देना चाहिए।”

  • अजय श्रीवास्तव, GTRI: “भारत को लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर, और नीतिगत स्थिरता में निवेश करना होगा।”

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत के साथ जल्द ही एक “मिनी-ट्रेड डील” हो सकती है, जिससे भारत पर टैरिफ 26% से कम हो सकता है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में वाशिंगटन में इस पर चर्चा की। CITI के राकेश मेहरा का मानना है कि यह समझौता भारत के टेक्सटाइल निर्यात को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जा सकता है।

चुनौतियां

  • उपभोक्ता मांग: टैरिफ से अमेरिकी बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है।

  • चीन की प्रतिस्पर्धा: यूरोपीय संघ और यूके जैसे बाजारों में चीन भारत को टक्कर दे सकता है।

  • कॉटन आयात शुल्क: भारत में 11.5% कॉटन आयात शुल्क लागत बढ़ाता है।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: उत्पादन क्षमता और लॉजिस्टिक्स में निवेश की जरूरत है।

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