सिद्धार्थनगर:
ध्वनि प्रदूषण आज समाज के लिए एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। अत्यधिक शोर जहां कानों को नुकसान पहुंचाता है और सुनने की क्षमता को कम करता है वहीं मानसिक तनाव नींद की कमी और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। तेज़ आवाज लोगों में चिड़चिड़ापन और सामाजिक असंतुलन की अहम वजह बन रही है।
सिद्धार्थनगर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि शोर से सिर्फ़ माहौल ही नहीं, बल्कि हमारा स्वास्थ्य भी बिगड़ता है। ध्वनि प्रदूषण पक्षियों व जीव-जंतुओं के जीवन चक्र को भी प्रभावित करता है।
पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए कुछ उपाय बताए हैं
किसी भी कार्यक्रम में ध्वनि की तीव्रता 75 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
वाहनों के हॉर्न का अनावश्यक प्रयोग न करें।
मशीनों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को ध्वनि अवशोषक वस्त्र दिए जाएं।
पौधों को लगाकर ध्वनि प्रदूषण कम किया जा सकता है।
पुलिस ने साफ कहा है कि ध्वनि प्रदूषण दंडनीय अपराध है। यदि कहीं पर अत्यधिक शोर से परेशानी हो रही है तो तुरंत 112 नंबर पर संपर्क करें।
👉 सिद्धार्थनगर पुलिस का संदेश है कि।
आइए मिलकर ध्वनि प्रदूषण को रोकें और एक शांत स्वस्थ समाज का निर्माण करें।
