निचलौल, उत्तर प्रदेश: शंभू राजभर ( भेड़ियारी ) नामक एक व्यक्ति अपनी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। शंभू का आरोप है कि उनकी जमीन, जो 2020 में उनके नाम पर पट्टे के रूप में दर्ज हुई थी, पर विपक्षी लाल बहादुर और उनके साथियों ने जबरन कब्जा कर लिया है। इस मामले में ग्राम प्रधान दुष्यंत सिंह और लेखपाल मनीष पटेल पर भी पैसे लेकर कब्जा करवाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
ड्रोन कैमरे से सर्वे के बाद उनकी जमीन उनके नाम पर पट्टा की गई थी
शंभू राजभर के अनुसार, ड्रोन कैमरे से सर्वे के बाद उनकी जमीन उनके नाम पर पट्टा की गई थी। हालांकि, इसके कुछ समय बाद विपक्षी पार्टियों ने कथित तौर पर फर्जी बेचनामा कागज बनवाकर जमीन पर दावा ठोक दिया। शंभू का कहना है कि उनकी जमीन पर लाल बहादुर ने जबरन भैंस बांधना शुरू कर दिया और बाद में लाठी-डंडों के बल पर कब्जा कर लिया।

तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने लाल बहादुर को जमीन खाली करने का निर्देश दिया।
जब इस मामले की शिकायत तहसीलदार और नायब तहसीलदार तक पहुंची, तो उन्होंने लाल बहादुर को जमीन खाली करने का निर्देश दिया। लेकिन, शंभू का आरोप है कि इसके बाद लाल बहादुर और उनके साथियों ने उन पर हमला करने की कोशिश की ताकि मामला उलझ जाए और शंभू जेल में फंस जाएं। शंभू ने बताया कि वह अकेले हैं, जबकि लाल बहादुर का खानदान बड़ा है, जिसके कारण उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है।
शंभू की पत्नी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं
शंभू की पत्नी ने इस मामले को लेकर पांच बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में जाने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें मिलने नहीं दिया। छठी बार में वह योगी जी से मिल पाईं और अपनी समस्या बताई। योगी जी ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। लेकिन शंभू का कहना है कि बैठवालियाँ के प्रबंधक जितेंद्र पाल सिंह, ग्राम प्रधान दुष्यंत सिंह और लेखपाल मनीष पटेल मिलकर लाल बहादुर का साथ दे रहे हैं। शंभू ने आरोप लगाया कि लेखपाल ने पैसे लेकर कब्जे को छूट दी है।
शंभू ने पूर्व एसडीएम मौर्य से भी इस मामले में मदद मांगी, लेकिन एसडीएम ने उन्हें लालची कहकर उनकी शिकायत को खारिज कर दिया। शंभू का कहना है, “हम लालची कैसे हैं? जब ड्रोन सर्वे हुआ, तभी तो हमारे नाम पर जमीन का पट्टा हुआ था।”
लाल बहादुर और उनके साथी भोजई ने मिलकर यह जमीन खरीदी थी, लेकिन उनके पास इस बेचनामे का कोई वैध कागज नहीं है
वहीं, लाल बहादुर का दावा है कि उन्होंने यह जमीन निचलौल के मंत्री जी के बेटे से खरीदी थी, जिसके पास पहले से ही उस जमीन पर कब्जा था। लाल बहादुर का कहना है कि उन्होंने और उनके साथी भोजई ने मिलकर यह जमीन खरीदी थी, लेकिन उनके पास इस बेचनामे का कोई वैध कागज नहीं है। शंभू का कहना है कि यह बेचनामा फर्जी है और उनकी जमीन पर जबरन कब्जा किया गया है।
यह मामला पिछले छह महीने से चल रहा है, लेकिन अभी तक इसका कोई निपटारा नहीं हो सका है। शंभू राजभर और उनकी पत्नी लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और ग्राम प्रधान की मिलीभगत के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले में प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग उठ रही है ताकि शंभू राजभर को उनकी जमीन वापस मिल सके।
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नोट: यह समाचार लेख तटस्थ और निष्पक्ष दृष्टिकोण से लिखा गया है। सभी पक्षों के दावों को शामिल किया गया है, लेकिन मामले की सत्यता की जांच के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से संपर्क अभी नहीं हो पाया है।
