बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा राहत हॉस्पिटल जिलाधिकारी के आदेश पर सील स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

सिद्धार्थनगर बढ़नी:

नगर पंचायत बढ़नी के इटवा रोड स्थित राहत हॉस्पिटल सर्जिकल एवं जच्चा-बच्चा केन्द्र पर मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के आदेश पर गठित जांच टीम ने अस्पताल के फर्जी पंजीकरण का खुलासा होने के बाद ओपीडी सहित कुल चार कमरों को सील कर दिया।

यह कार्रवाई उस समय हुई जब स्थानीय समाचार पत्र में बिना रजिस्ट्रेशन राहत हॉस्पिटल के संचालन की खबर प्रकाशित हुई थी। खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए।

🔹 उच्च स्तरीय टीम की जांच में फर्जी सर्टिफिकेट उजागर

जिलाधिकारी के आदेश पर गठित टीम में एसीएमओ नोडल नैदानिक स्थापना डॉ. प्रमोद कुमार प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अविनाश चौधरी फार्मासिस्ट राम सहाय वर्मा तहसीलदार अजय कुमार मौर्य एवं माधवानंद शुक्ल शामिल थे।

टीम ने मौके पर पहुँचकर अस्पताल के दस्तावेजों की गहन जांच की जिसमें प्रबंधन रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। अस्पताल द्वारा दिखाया गया सर्टिफिकेट भी फर्जी पाया गया।

एसीएमओ डॉ. प्रमोद कुमार ने स्पष्ट किया

> जो रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अस्पताल प्रबंधन ने दिखाया वह हमारे विभाग द्वारा जारी नहीं किया गया है। फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर अस्पताल के चार कमरों को तत्काल सील कर दिया गया है।

🔹 फर्जी अस्पतालों पर प्रशासन का सख्त रुख

मजिस्ट्रेट अजय कुमार मौर्य की मौजूदगी में राहत हॉस्पिटल की ओपीडी सर्जिकल सेक्शन व अन्य तीन कक्ष सील कर दिए गए। प्रशासन ने इसे अवैध अस्पतालों के विरुद्ध शुरू की गई सख्त मुहिम का हिस्सा बताया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति या फर्जी रजिस्ट्रेशन पर अस्पताल चलाने वालों पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

⚕️ स्वास्थ्य विभाग की अन्य कार्रवाई कई सेंटरों पर नोटिस

राहत हॉस्पिटल के अलावा बढ़नी क्षेत्र के अन्य चिकित्सा केन्द्रों पर भी कार्रवाई की गई

श्याम पैथालॉजी सेंटर  नोटिस चस्पा किया गया।

श्री डायग्नोस्टिक सेंटर बन्द मिला नोटिस जारी।

न्यू बलरामपुर डायग्नोस्टिक सेंटर खुला मिला नोटिस दिया गया।

यूनिक पैथालॉजी सेंटर खुला मिला नोटिस जारी किया गया।

जिले में स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई से अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि

फर्जी दस्तावेजों के सहारे अस्पताल चलाने वालों पर अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

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