मेघालय में 4,000 टन कोयला गायब: मंत्री का दावा- बारिश में बहकर बांग्लादेश चला गया

शिलांग: मेघालय के दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले के रानीकोर ब्लॉक में राजाजू और डिएंगनागांव के सरकारी डिपो से लगभग 3,950.15 मेट्रिक टन अवैध रूप से खनन किया गया कोयला रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया है। इस मामले में मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आबकारी मंत्री किरमेन शायला के उस बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारी बारिश के कारण कोयला बहकर असम और बांग्लादेश चला गया होगा।

कोयला गायब होने का खुलासा

मेघालय हाई कोर्ट में जस्टिस (रिटायर्ड) बी.पी. कटके की अध्यक्षता वाली समिति की 31वीं अंतरिम रिपोर्ट में इस गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ। मेघालय बेसिन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MBDA) के रिकॉर्ड के अनुसार, डिएंगनागांव (रि-भोई जिला) डिपो में 1,839.03 मेट्रिक टन और राजाजू (पश्चिम खासी हिल्स जिला) डिपो में 2,121.62 मेट्रिक टन कोयला दर्ज था। हाल की जांच में डिएंगनागांव में केवल 2.5 मेट्रिक टन और राजाजू में मात्र 8 मेट्रिक टन कोयला बचा था। जस्टिस कटके ने इसे प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि पहले से चिह्नित अवैध कोयले को “अज्ञात व्यक्तियों” द्वारा उठा लिया गया, जो प्रवर्तन में गंभीर खामियों को दर्शाता है।

मंत्री का बेतुका बयान

28 जुलाई 2025 को पत्रकारों से बातचीत में आबकारी मंत्री किरमेन शायला ने कहा, “मेघालय में सबसे ज्यादा बारिश होती है। यह संभव है कि भारी बारिश ने कोयला बहा दिया हो। बारिश का पानी असम और बांग्लादेश की ओर जाता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास इस दावे का कोई ठोस सबूत नहीं है और यह उनका निजी अनुमान है। शायला के इस बयान की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है, जहां इसे गैर-जिम्मेदाराना और हास्यास्पद बताया जा रहा है।

हाई कोर्ट की फटकार

25 जुलाई 2025 को जस्टिस एच.एस. थांगख्यू और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कोयला पहले से चिह्नित था, फिर भी इसे अज्ञात व्यक्तियों द्वारा ले जाया गया, जो जमीन पर प्रवर्तन की विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिपो की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, कोयले को अवैध रूप से ले जाने वालों का पता लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा।

अवैध खनन का पुराना इतिहास

मेघालय में अवैध कोयला खनन और परिवहन लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अप्रैल 2014 में पर्यावरणीय क्षति और खतरनाक रैट-होल खनन प्रथाओं के कारण कोयला खनन और परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद, जस्टिस कटके की समिति ने अपनी कई रिपोर्टों में अवैध खनन के जारी रहने की बात उजागर की है। फरवरी 2025 में समिति की 27वीं अंतरिम रिपोर्ट में छह कोयला-समृद्ध जिलों में अवैध खनन के सबूत मिले थे। समिति ने ड्रोन सर्वेक्षण और कड़े निगरानी उपायों की सिफारिश की है।

सरकार की कार्रवाई

राज्य सरकार ने कोयले के गायब होने के संबंध में राजाजू, डिएंगनागांव और दक्षिण गारो हिल्स में FIR दर्ज की हैं, लेकिन जांच की प्रगति पर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि वे यूएवी सर्वे डेटा के साथ भौतिक स्टॉक की जांच करें और बड़े अंतर मिलने पर FIR दर्ज करें। सरकार ने कोक ओवन संयंत्रों के ऑडिट की प्रक्रिया शुरू की है, जिसके निष्कर्ष अगली सुनवाई में पेश किए जाएंगे।

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