सफाई कर्मियों की लापरवाही और नगर पंचायत की चुप्पी स्वच्छ भारत मिशन को ठेगां।
गांधीनगर वार्ड की जनता लगातार सफाई व्यवस्था को लेकर परेशान है। यहां न तो नियमित रूप से झाड़ू लगाई जाती है और न ही नाले की साफ-सफाई की जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत के सफाई कर्मचारी जानबूझकर इस क्षेत्र की अनदेखी करते हैं।
आश्चर्यजनक यह है कि जिस गांधीनगर वार्ड के क्षेत्र में सफाई नहीं की जाती वहीं पर दूसरे जगह का कूड़ा लाकर गिराया जा रहा है। इसका प्रमाण खींची गई एक तस्वीर है जिसमें साफ दिखाई देता है कि सफाई कर्मचारी वार्ड के बाहर से कचरा लाकर यहीं फेंक रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि गंदगी और रुके पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है बच्चों और बुजुर्गों के बीमार होने का ख़तरा बना हुआ है।
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य यह बात है कि नाले में रुका हुआ गंदा पानी महीनों से जमा है। नाले में कोई पत्थर नहीं लगाया गया है जिससे पानी की निकासी बाधित है। यही कारण है कि नाला हमेशा भरा रहता है और गंदगी का ढेर बनता जा रहा है।
इसके बावजूद नगर पंचायत न तो सफाई सुनिश्चित कर रही है और न ही नालों की मरम्मत कर रही है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
यह कोई पहली बार नहीं है जब गांधीनगर वार्ड की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी यही मामला मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित हो चुका है। लेकिन न तो नगर अध्यक्ष ने जांच करवाई न ही वार्ड सभासद ने इस पर कोई ध्यान दिया और न ही अधिशासी अधिकारी ने कोई कार्रवाई करना उचित समझा। आज अधिशासी अधिकारी द्वारा जब पूछा गया तो कहते हैं हमने सफाई करवाई और जवाब देने के लिए उन्होंने साफ-साफ मना कर दिया तहसील समाधान दिवस में ।
आज जिलाधिकारी महोदय से सीधी बात की गई जिसमें इस गंभीर स्थिति की पूरी जानकारी दी गई। जिलाधिकारी महोदय ने आश्वासन दिया कि इस मामले में 100% कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले को तत्काल प्रभाव से देखेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाएंगे।
जनता की मांग:
गांधीनगर वार्ड की जनता ने जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि:
✔️ नाले में जमा गंदा पानी को जल्द निकाला जाए।
✔️ नाले में उचित पत्थर व निर्माण कार्य कराकर पानी का बहाव सुनिश्चित किया जाए।
✔️ इस क्षेत्र में नियमित झाड़ू सफाई व्यवस्था लागू की जाए।
✔️ कचरा फेंकने पर रोक लगाई जाए।
✔️ जिम्मेदार नगर पंचायत अधिकारियों की लापरवाही पर उचित कार्रवाई की जाए।
अब सबकी निगाहें इस पर टिक गई हैं कि प्रशासनिक विभाग इस पर किस प्रकार की ठोस कार्रवाई करेगा।
